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हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के कारण लक्षण और निवारण
By  Blog Author

Team Jiyyo | Updated: Sep 24, 2021

हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के कारण लक्षण और निवारण

उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण नसों में रक्त का प्रवाह अधिक हो जाता है। हमारे शरीर में रक्त का प्रवाह एक निश्चित गति से होता है।यदि हेल्थ गाइडलाइंस या स्वास्थ्य निर्देशों की बात करें तो शरीर में रक्त का दबाव 120/80mmHg से अधिक नहीं होना चाहिए।

यदि रक्त का दबाव या प्रवाह इस निश्चित सीमा को पार कर जाता है तो ऐसे में शरीर में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन की स्थिति पैदा हो जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप ना सिर्फ़ नसों के लिए ख़तरनाक है बल्कि ये शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों जैसे हृदय और दिमाग़ को भी नुक़सान पहुँचा सकता है।

हमारा हृदय रक्त को शुद्ध करने के लिए एक निश्चित गति से कार्य करता है। एक सामान्य रक्तचाप की स्थिति में हृदय को रक्त पंप करने में कोई परेशानी नहीं होती। ठीक इसके उल्टा यदि रक्तचाप बढ़ जाता है तो ऐसे में हृदय पर एक अलग दबाव पड़ना शुरू हो जाता है। इसके कारण हृदय को काफ़ी तेज़ी से कार्य करने की ज़रूरत पड़ती है। यह स्थिति हृदय के लिए ख़तरनाक है जो हार्ट अटैक को जन्म दे सकती है।

ब्लड प्रेशर की दो स्थितियां होती हैं। उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप। जब रक्त का दबाव अत्यधिक बिंदु पर होता है तो उसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। ठीक वहीं जब रक्त का दबाव या रक्तचाप सबसे निम्न बिंदु पर होता है तो उसे लोवेस्ट ब्लड प्रेशर या डिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है।

 

 हाइपरटेंशन के प्रकार

 

हाइपरटेंशन दो प्रकार का होता है-

1.) प्राइमरी हाइपरटेंश

प्राइमरी हाइपरटेंशन वह स्थिति है जो किसी बीमारी के चलते नहीं होती। कई बार लोगों को बढ़ती उम्र के साथ उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है। इस स्थिति में लोग दवाइयों के द्वारा अपने रक्तचाप को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। 

 

2.) सेकेंडरी हाइपरटेंशन

सेकेंडरी हाइपरटेंशन वह स्थिति है जो किसी बीमारी या उसके इलाज के तहत लेने वाली गोलियों के कारण होती है। सेकेंड्री हाइपरटेंशन कम उम्र में भी हो सकता है। इसी के साथ ये मानसिक स्थिति के सही न होने पर भी काफ़ी बढ़ जाता है।

 

रिसर्च के अनुसार लोगों में प्राइमरी हाइपरटेंशन की समस्या आम तौर पर देखने को मिलती है जो लगभग 90%-95% होती है। वहीं यदि बात करें सेकेंडरी हाइपरटेंशन की स्थिति की तो लगभग 5%-10% परसेंट लोगों की इस समस्या से जूझते हुए पाए जाते हैं।

ज़्यादातर लोगों में उम्र बढ़ने के साथ साथ उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ती है। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के लिए कुछ और तत्व ज़िम्मेदार होते हैं। आख़िर ऐसे कौन से कारण हैं जिनसे उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन की समस्या हो जाती है। तो आइए बात करते हैं हाइपरटेंशन से सम्बंधित कुछ कारणों के बारे में। 

 

उच्च रक्तचाप के कारण

 

1.) मोटापा

2.) धूम्रपान या स्मोकिंग 

3.) शराब का सेवन

4.) असंतुलित आहार 

5.) नींद की कमी 

6.) तनाव या डिप्रेशन 

7.) शारीरिक गतिविधि में कमी

 

ये सारे ही कारण उच्च रक्तचाप की समस्या को जन्म दे सकते हैं। इसी के साथ आपको बताते चलें कि हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप एक ऐसी समस्या है जो कई बार लोगों में नज़र नहीं आती। ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिनमें उच्च रक्तचाप की समस्या तब पकड़ में आयी हो जब वह काफ़ी ख़तरनाक स्थिति पर पहुँच गई हो अर्थात जब वह सिस्टोलिक स्थिति को ग्रहण कर चुकी हो।

ज्यादातर लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है क्योंकि इसके लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते हैं। 

हालाँकि हाईपरटेंशन के लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे संकेत हैं जिनके द्वारा उच्च रक्तचाप की समस्या को देखा जा सकता है। कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं-

 

- अत्यधिक सर में दर्द होना 

- छाती में दर्द या दबाव 

- स्पष्ट दिखाई न देना 

- बेचैनी या घबराहट होना 

- साँस फूलना 

- शरीर का तापमान बढ़ जाना 

- कभी कभी मूत्र में रक्त आना 

- थकान महसूस होना 

- भ्रम या इलुजन की स्थिति पैदा होना

 

हाईपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के नुक़सान 

 

हाइपरटेंशन हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है जैसे-

 

1.) हाइपरटेंशन के कारण हृदय की धमनियां नष्ट होने का ख़तरा रहता है।

2.) हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के कारण धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह तेज़ी से होने लगता है जिससे उनके फटने का डर बना रहता है। ये नसों और धमनियों को टाइट भी कर सकता है।

3.) हाइपरटेंशन की वजह से हृदय को अधिक कार्य करने का दबाव पड़ता है जिससे कि उसके ख़राब होने का ख़तरा बना रहता है। 

4.) इसी तरह जब नसों में रक्त का प्रवाह तेज़ी से होने लगता है तो मस्तिष्क की कोशिकाओं और ऊतकों के ख़राब होने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। 

5.) उच्च रक्तचाप के कारण मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती है। ये ब्रेन डेड या मस्तिष्कों को नुक़सान पहुँचा सकता है। हाइपरटेंशन की वजह से दिमाग में ब्लड सप्लाई बहुत कम हो जाती है।

 

उच्च रक्तचाप की जाँच

 

उच्च रक्तचाप की जाँच करने के लिए चिकित्सक मरीज़ के सम्पूर्ण शरीर की जाँच करता है। इससे उन्हें यह अंदाज़ा हो पाता है कि रक्तचाप किस स्तर तक ऊपर उठ गया है। उच्च रक्तचाप पर नज़र रखना ज़रूरी है। हालाँकि उच्च रक्तचाप के लक्षण शरीर में कई बार दिखाई नहीं देते लेकिन हो सकता है कि यह बीमारी शरीर में पनप रही हो। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि 20 साल से लेकर 40 साल तक के और उससे अधिक के लोग अपने शरीर का ख़ास ख्याल रखें। साल में एक बार रक्तचाप की जाँच अवश्य करवाएं।

 

रक्तचाप की जाँच करने के लिए चिकित्सा निम्नलिखित तरीक़ों को अपना सकते हैं जैसे-

 

1.) मूत्र की जाँच

2.) रक्त के द्वारा 

3.) कोलेस्ट्रॉल की जाँच 

4.) दिल की धड़कनों को मापकर (इलेक्ट्रियोकार्डियोग्राम)

 

हाइपरटेंशन का निवारण कैसे करें?

 

हाईपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के निवारण के लिए कुछ निर्देश हैं जिनका पालन करना आवश्यक है। आइए देखते हैं कि वे क्या हैं-

 

1.) जिन लोगों को हाईपरटेंशन की समस्या है उन्हें चिकित्सा से परामर्श लेना ज़रूरी है। 

2.) हाइपरटेंशन की समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टर के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। 

3.) जिन दवाइयों को डॉक्टर ने लेने को कहा है उन्हें समय पर लें।

4.) समय समय पर अपने रक्तचाप को मापते भी रहें।

5.) यदि आपका किसी भी प्रकार का कोई अन्य इलाज चल रहा है तो ऐसे में किसी भी चीज़ या दवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर को संपूर्ण बात अवश्य बताएँ।

6.) चिकित्सक हाईपरटेंशन की समस्या को ख़त्म करने के लिए दवाइयां देते हैं। यदि दवाइयों से आराम नहीं हो पा रहा है या समस्या का निवारण नहीं हो पा रहा है तो ऐसे में चिकित्सा हृदय प्रत्यारोपण या हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया करने की सलाह भी दे सकते हैं।

 

निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा हम हाईपरटेंशन से बचाव कर सकते हैं-

 

1.) जीवन शैली

अपनी जीवन शैली को नियमित बनाए रखें। अपने जीवन में अनुशासन का पालन करें। हर चीज़ को समय पर करें ताकि आपको मानसिक तनाव से न गुज़रना पड़े।

 

2.) व्यायाम

शरीर को फ़िट रखना काफ़ी ज़रूरी है। प्रतिदिन व्यायाम करने से ना सिर्फ़ शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है बल्कि फ़ालतू वसा भी शरीर से कम होती है।ये ना सिर्फ़ शरीर को सुडौल रखने में मदद करता है बल्कि व्यायाम से रक्तचाप का स्तर भी नियमित बना रहता है।

 

3.) संतुलित आहार

नमक भोजन के स्वाद बढ़ाने में काफ़ी ज़रूरी है लेकिन हमें नमक की एक निश्चित मात्रा ही अपने आहार में लेनी चाहिए। यदि नमक की ज़्यादा मात्रा का सेवन किया जाए तो ऐसे में रक्तचाप की समस्या हो सकती है। 

वैसे भी जो लोग हाइपरटेंशन से जूझ रहे हैं उन्हें नमक का सेवन करने से मना किया जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को हाईपरटेंशन नहीं भी है उन्हें भी नमक का इस्तेमाल सोच समझ कर करना चाहिए। अपने आहार में सब्ज़ियां, फल, मांस और दूध को शामिल करना भी एक अच्छा उपाय है।

 

4.) मानसिक तनाव करें कम

आजकल की तनाव से भरपूर ज़िंदगी में रक्तचाप का सही ना होना एक आम समस्या हो गया है। ऐसे में मानसिक तनाव से बचने के लिए हमें कुछ ऐसी चीज़ों को करने की आवश्यकता होती है जिससे हम तनाव से बच सकें। मानसिक तनाव को कम करने के लिए योगा करना चाहिए। इसी के साथ संगीत सुन कर भी हम अपने मस्तिष्क को प्रसन्न कर सकते हैं।

 

5.) पर्याप्त नींद

रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए पर्याप्त नींद का होना आवश्यक है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ पर ये देखने को मिला है कि जो लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं उन्हें रक्तचाप की समस्या हो जाती है। इसलिए अपने नींद के घंटों से समझौता बिलकुल भी ना करें।

 

निष्कर्ष

इस लेख में हमने हाइपरटेंशन से सम्बंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की है। इस लेख में बतायी गई समस्त बातें जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिखी गई हैं। इन सभी बातों का अनुसरण करने से पूर्व आपको अपने स्वास्थ्य को एक बार जाँचना आवश्यक है। 

यदि आपको पहले से कोई एलर्जी या समस्या है तो ऐसे में डॉक्टर के परामर्श के बग़ैर किसी भी बात का अनुसरण न करें।

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Corona indeed has been the highest scorer for the number of lives claimed in the year 2020. Wherein coronavirus has grabbed all the attention in the medical fraternity across the world, Have you ever imagined, what are the other life-threatening diseases in the country, that has outperformed any other country(measured by population) in controlling the spread of coronavirus?

10 Amazing Health Hacks at Work

10 Amazing Health Hacks at Work

Often during work, we all tend to forget ourselves. Indeed work is what gives us bread and butter to live a better life, hence work is always synonymous with financial independence and we all tend to achieve that forgetting our own health.

Road Blocks for NDHM

Road Blocks for NDHM

National Digital Health Mission​, this ambitious mission is a move forward in strengthening the Indian health infrastructure lacking patient records and health. The government’s proposal, now put up for public review, focuses on necessary data privacy measures that need to be put in place in order to safeguard the confidentiality of sensitive health information of citizens.

एंग्जायटी (Anxiety) क्या है - कारण, सामान्य लक्षण, प्रकार और इलाज

एंग्जायटी (Anxiety) क्या है - कारण, सामान्य लक्षण, प्रकार और इलाज

एंग्जायटी (Anxiety) इंसान के लिए घातक है! यह मस्तिष्क को चोट देने के साथ ही शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। इस दौड़-भाग में हम लोगों की जिंदगी जैसी हो गई है उसमें एंग्जायटी (Anxiety) का होना बहुत आम बात है। रिश्तों में विश्वास की कमी, एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़, असुरक्षित महसूस करना, लड़ाई-झगड़ा, ग़लत व्यवहार, अनियमितता, समाज से दूर रहना, अपनी ही जिंदगी में लीन रहना यह सब बेचैनी के कारण हैं। एंग्जायटी (Anxiety) तो हर किसी को होती है परन्तु इसे बीमारी के तौर पर पहचानना मुश्किल है। अगर कोई विशेष नकारात्मक विचार या परेशानी बहुत लंबे वक्त तक बनी रहे और उससे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगे तो ये वाकई खतरनाक है।

क्या है ब्लैक फंगस- कारण, लक्षण और कैसे ब्लैक फंगस से बचें ?

क्या है ब्लैक फंगस- कारण, लक्षण और कैसे ब्लैक फंगस से बचें ?

2019 के अंत में दुनिया में एक बीमारी ने जन्म लिया जिससे कोरोना या कोविड-19 का नाम दिया गया। यह बीमारी इतनी तेज़ी से फैलती है और यह व्यक्ति की जान तक ले सकती है, इस बात को देखते हुए डब्लूएचओ अर्थात वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया। पूरा देश और विश्व इस महामारी से अभी भी लड़ रहा है और इसे पूरी तरह से भगाने की कोशिश में जुटा हुआ है। अभी यह महामारी पूरी तरह से ख़त्म होती कि एक और बीमारी डॉक्टरों की नज़र में आईं। इस बीमारी को ब्लैक फंगस नाम दिया गया है। कोरोना वायरस की तरह ही इस बीमारी का एक इतिहास है। यह बीमारी कई साल पहले भी फैल चुकी है और कोरोना वायरस की सेकेंड वेव अर्थात दूसरी लहर के बाद पुनः इस बीमारी ने अपना प्रभाव दिखाया है।

ब्रेन ट्यूमर क्या है  - कारण, लक्षण, और इलाज

ब्रेन ट्यूमर क्या है - कारण, लक्षण, और इलाज

इंसान के दिमाग की बात की जाए तो इंसान का दिमाग 1400 ग्राम का होता है। इसके 4 भाग होते हैं। फ्रंटल यानी दिमाग के जो सामने का हिस्सा होता है, टेंपोरल मतलब जो बायीं तरफ़ (लेफ्ट हैंड साइड) का दिमाग होता है, पैरंटरल मतलब जो दायीं तरफ़ (राइट हैंड साइड) का दिमाग होता है और ऑक्सीपिटल जो दिमाग का पीछे का हिस्सा होता है। दिमाग का हर हिस्सा अपना अलग कार्य करता है जैसे फ्रंटल पार्ट का काम होता है सोचने का, पैराइटल का कार्य होता है छूने या फिर दर्द के एहसास का, टेंपोरल का काम होता है सुनना, देखना और भाषा को समझना। इसी तरह ऑक्सीपिटल का काम होता है वस्तुओं को पहचानना। मस्तिष्क शरीर का बहुत अहम अंग है। इसका सही रहना आवश्यक है। जब दिमाग में गांठ बन जाती है तो इसको ट्यूमर कहते हैं। ब्रेन के जिस हिस्से में ट्यूमर होता है तो उस हिस्से से नियंत्रित होने वाला शरीर का भाग प्रभावित होता है।

 डेंगू के कारण लक्षण और निवारण

डेंगू के कारण लक्षण और निवारण

डेंगू एक ख़तरनाक बीमारी है जिसका समय रहते उपचार करवाना आवश्यक है। डेंगू एक ख़तरनाक बीमारी है क्योंकि अभी तक डेंगू का कोई विशिष्ट इलाज नहीं खोजा जा सका है। डेंगू एक वायरस के कारण होता है इस वजह से अभी तक इसके इलाज को खोजना संभव नहीं हो सका है। डेंगू बीमारी से बचाव करना बेहद ज़रूरी है अन्यथा ये प्राणघातक भी हो सकता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम इस बीमारी की गंभीरता को समझें और इसे हल्के में बिलकुल भी ना लें। डेंगू बीमारी में व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स या लाल रक्त कणिकाओं का स्तर हद से ज़्यादा कम हो जाता है जोकि अपने आप में ही एक ख़तरनाक स्थिति है। आप जानकर चौंक जाएंगे कि यदि लाल रक्त कणिकाओं का स्तर एक निश्चित पैमाने से कम हो जाएं तो ऐसे में व्यक्ति की जान जाने का भी ख़तरा रहता है। अब आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसी मच्छर का काटना एक व्यक्ति के लिए कितना भारी पड़ सकता है। डेंगू से बचना बेहद ज़रूरी है और इसके लिए हमें ये जानना होगा कि डेंगू के कारण क्या हैं। इसी के साथ हम डेंगू के लक्षण और निवारण के बारे में भी चर्चा करेंगे। तो आइए अपनी इस लेख को आगे बढ़ाते हैं और बात करते हैं डेंगू के कारण के बारे में।

WORK FROM HOME JOBS IN THE NEW WORLD ORDER

WORK FROM HOME JOBS IN THE NEW WORLD ORDER

In today's era work from home jobs have opened up a new horizon of opportunities. Now boundaries no longer matter. All that matters is how good you are !

अग्न्याशय कैंसर (Pancreatic cancer) के कारण, लक्षण और इलाज !

अग्न्याशय कैंसर (Pancreatic cancer) के कारण, लक्षण और इलाज !

जैसा कि हम सब हम सभी जानते हैं कि कैंसर एक लाइलाज बीमारी है। वैसे तो कैंसर एक ख़तरनाक बीमारी है लेकिन यदि शुरुआती स्तर पर इसकी पहचान हो जाए तो ऐसे में कैंसर का इलाज संभव है। कैंसर अपने चरम स्तर अर्थात आख़िरी स्टेज पर लाइलाज माना जाता है। कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर विभाजित होना शुरू हो जाती हैं। शरीर में कैंसर कई प्रकार से फैलता है। इसका मतलब है कि शरीर में कैंसर कई अंगों पर अपना असर दिखा सकता है। अग्न्याशय कैंसर भी एक प्रकार का कैंसर है जो काफ़ी ख़तरनाक माना जाता है।

E-Clinic and Maternal Health

E-Clinic and Maternal Health

Maternal wellness is as necessary as the healthy future of the country, it not only includes the physical but also the mental wellbeing of an expecting mother.

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